बढ़े चलो PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Wednesday, 09 December 2009 15:21

दुनिया मदहोश है..देश सो रहा है..कोई किसी को प्रेरणा देने वाला नहीं हो तो अपनी आत्मा का आह्वान करो..कर्त्तव्य पथ पर डट जाने के लिए स्वयं को तैयार करो..प्रकृति की अनमोल धरोहर अपने शरीर से अमृत  को प्राप्त करो..बढ़े चलो..नेतृत्व करो..अंधकार को चीर दो..विजय का वरण करो!

ग्यारहवीं वर्षगांठ के उपलक्ष
में पाठकों, विज्ञापनदाताओं,
शुभचिंतकों और सहकर्मी साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं..अभिनंदन!! ..वैश्विक मंदी, कमजोर क्रयशत्ति और ठप पड़े विकास के दौर में आपका संबल स्तुत्य है और रिश्तों की प्रगाढ़ता का प्रतीक है। यह सहकार बना रहे और महानगर टाइम्‍स सुख-दु:ख में सदैव पाठकों और जनता के साथ बना रहे यही ईश्वर से कामना है। आपका संबल ही महानगर टाइम्‍स की शत्ति है तथा विश्वसनीयता, निष्पक्षता और चरित्र ही सबसे बड़ी ताकत हैं। वर्तमान में समाचार पत्र उद्योग के सामने मौजूद कड़ी चुनौती का मुकाबला भी आपके बल पर करेंगे ..राष्ट्रीयता और देशभत्ति को समर्पित..जन-जन का विश्वास जीतने की यह यात्रा अनवरत चलती रहेगी..चरैवेति-चरैवेति!!


हर बार की तरह गत विधानसभा चुनाव में भी महानगर टाइम्‍स ही खरा उतरा। मीणा-धानका विवाद से लेकर भाजपा को हरा रही भाजपा की रिपोर्टिंग अनूठी रही। सिर्फ यही समाचार पत्र रहा जो त्रिशंकु विधानसभा के आकलन तक पहुंच सका और भाजपा के कड़े संघर्ष के बावजूद कांग्रेस की बढ़त को इंगित किया। लोकसभा चुनाव सामने हैं..विधानसभा चुनाव से अधिक जटिल और उलझन भरे..देश चाहता है मजबूत भारत को देखना और पेशेवर क्षेत्रीय नेता राष्ट्रहित को गौण करने पर उतारू हैं.. राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए सदैव से प्राणप्रण से समर्पित राजस्थान को एक बार फिर राष्ट्रीय भूमिका का निर्वाह करना है..। सचमुच, भारत-चीन युद्घ के बाद दूसरी बार भारत अंदर से इतना जर्जर और कमजोर दिख रहा है और हमारी सरकारें पंगु नजर आ रही है। मुंबई हमलों का जवाब तो दूर, हम आंतरिक ह्ष्टि से इतने जर्जर हो गए हैं कि भविष्य की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। चीन-पाकिस्तान नजदीक आ  रहे हैंऔर हम जैसे अमरीका के पृृपाकांक्षी हो गए हैं..ओबामा-ओसामा के प्रतीकात्मक हिस्से में बंटे हुए दौर को टुकुर-टुकुर देख रहे हैं तथा उसकी यंत्रणाएं सहने को मजबूर हैं। ..राजस्थान भी पिछड़ रहा है। सरकारों का बदलना उत्साह का संचार नहीं कर रहा ..ऐसी जड़ता छाई हुई है जहां मंत्रिमंडलों का बनना, सरकार की घोषणाएं, योजनाएं और तरह-तरह के कदम बेमानी हो गए हैं..जनता को जैसे इन सबसे कोई लेना-देना  नहीं है..चुनी हुई सरकार बोझ लगने लगी और आम आदमी सरकारी नियमों-कानूनों से दबा हुआ अपने संकटों में घुट-घुट कर  जीने-मरने  को मजबूर है। इस व्यवस्था में आदमी दु:खी है..सिसक रहा है… घिसट रहा है!!
निराशा भरे माहौल में आशा की किरण है तो हमारा अपना स्वत्व..हमारा आत्मबल-विश्वास..हमारी प्रेरणाएं और हमारी महान विरासत..जिनके बूते पर हम तमाम संकटों से निजात पाते रहे हैं ..तमाम चुनौतियों को पार करके संकट की घड़ी में एकजुट होकर सिंहनाद करते हैं तथा समय की शिला पर अमिट रेख बनाते हुए आगे बढ़ जाते हैं। गीता का ज्ञान वही है..यही है अठारहों पुराणों का निष्कर्ष..चारों वेदों का भाष्य स्मृतियों और उपनिषदों का निचोड़। इसी शत्ति के बल पर भारत अनंतकाल से विश्व का दिशादर्शन करता रहा है और सिर ऊंचा उठाकर दुनिया के सामने खड़ा है..हमें भी युग प्रहरी की भूमिका में सन्नद्घ होना होगा..अपने कर्त्तव्यों और दायित्वों का निर्वाह करते हुए..स्वार्थ से ऊपर उठकर सच्चे नागरिक होने का सबूत देना होगा। यह साधना से कम नहीं..
लेकिन यही युग धर्म है..इसका निर्वाह करना ही होगा।
हार्दिक मंगलकामनाएं !!


 

 

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