Opinion
विश्व को जोड़ेगा मानव कल्याण PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Monday, 24 May 2010 13:12

गोपाल शर्मा...
गणाधिपति आचार्य तुलसी के बाद तेरापंथ के दसवें आचार्य के रूप में आचार्य महाप्रज्ञ का अधिष्ठित होना बड़ी घटना नहीं थी; राष्ट्र के जाने-माने विचारक और चिंतक के रूप में आचार्य महाप्रज्ञ को बुलंदियां हासिल थीं; लेकिन गणाधिपति तुलसी के देहावसान के बाद आचार्य महाप्रज्ञ के सामने एक बड़ा प्रश्न मंडरा रहा था कि उनके बाद तेरापंथ की श्रेष्ठ परम्परा की अभिवृद्घि के संवाहक कौन हो सकते हैं..और, इसका जवाब उन्होंने पाया मुदित कुमार से महाश्रमण बने उन प्रतिभाशाली युवा मुनि में, जो युवाचार्य पद ग्रहण करते समय सिर्फ 35 वर्ष के थे।

आचार्य के प्रति अगाध आस्था, परम्परा को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने का गुरुत्तर दायित्व बोध, चेहरे पर सतत जिज्ञासा भाव, आंखों में आकर्षण, मानव कल्याण के प्रति जागरूक, विवादों से दूर रहने की प्रवृत्ति, धीरता और गंभीरता के मिले-जुले स्वरूप का किसी युवा मुनि में दिखना आश्चर्य पैदा करता है।

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साधुवाद गहलोत साहब! PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Tuesday, 18 May 2010 12:02

शेखावत साहब और सुखाडिय़ाजी ने राजस्थान में यही विशिष्ट परंपरा छोड़ी...
गोपाल शर्मा..
.भारत केगौरव और राजस्थान के हृदय सम्राट भैरोंसिंह शेखावत के निधन के बाद गहलोत सरकार ने शेखावत स्मृति स्थल के लिए उपयुक्त थान उपलब्ध करवाकर उस परम्परा को आगे बढ़ाया है जो अब राजस्थान की विशिष्टता बन गई और जिस महान परम्परा का निर्माण भैरोंसिंह शेखावत और मोहनलाल सुखाडिय़ा ने मिलकर किया।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसके लिए कोटिश: साधुवाद के पात्र हैं। राजस्थान में सर्वत्र उनके इस कार्य की उन्मुक्त हृदय से भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। शेखावत के निधन के दिन गहलोत जिस तरह बार-बार वहां पहुंचे..वह भी अनूठी घटना है।

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राष्ट्र चिंतन के सारथी PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Monday, 10 May 2010 12:00

गोपाल शर्मा...
सचमुच राष्ट्रीय संत थे वे। पोप जॉन पाल द्वितीय को मृत्यु के बाद विश्व सम्मान मिला तो सौ करोड़ भारतीयों के समक्ष यक्ष प्रश्न गूंज रहा था कि क्या हमारे यहां कोई ऐसा संत नहीं जिनके समक्ष श्रद्घा से सबका मस्तक झुक जाए..वाणी विराम ले ले; जगद्गुरु शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती पर रंजिशवश लगे कथित कलंक से यह सोच अधिक गहरा गया था।..लेकिन यह प्रश्न उत्तरविहीन नहीं था..इसका जवाब थे आचार्य महाप्रज्ञ!

श्वेत वस्त्रों से आच्छादित शान्ताकार आचार्य महाप्रज्ञ ज्ञान और विवेक के जीवंत प्रतीक थे। 'प्रेक्षाÓ शब्द प्रईक्ष धातु से मिलकर बना है। यह गहराई से देखने का समानार्थी है।

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जो वे नहीं हो सके PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Monday, 18 January 2010 11:55

गोपाल शर्मा....
भारत के सबसे कद्दावर कम्युनिस्ट नेता थे ज्योति बसु! उनके बाद शायद ही भारत में कोई कम्युनिस्ट नेता पैदा हो जिसका प्रधानमंत्री बनना लगभग सुनिश्चित हो जाए ..जो 23 साल तक लगातार मुख्यमंत्री रहने के बाद अपनी ही पार्टी के नेता के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़े ..जो उपमुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष रहा हो.. जिसका दिल्ली आना घटना हो.. 40 सालों तक पार्टी की केन्द्रीय भूमिका में महत्वपूर्ण स्थान हो और प्रादेशिक क्षत्रप होते हुए भी राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठता एवं सम्मान प्राप्त हो। ..निश्चय ही, भारत के लिए वे पं. जवाहरलाल नेहरू-इंदिरा गांधी और अटलबिहारी वाजपेयी के श्रेणी के नेता नहीं थे और न उन कम्युनिस्ट नेताओं से अलग थे, जिनको निर्णायक क्षणों में हमेशा गलती करते हुए पाया गया है ..और,

Last Updated on Wednesday, 03 February 2010 07:58
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